असरोही एवं नगला धोबी मे जल भराव की समस्या जन जीवन हुआ अस्त व्यस्त
ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर किया विरोध

असरोही और नगला धोबी में जलभराव से जनजीवन अस्त-व्यस्त, ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन
(प्रेम कुमार शाक्य)
जसवन्तनगर/इटावा। क्षेत्र की ग्राम पंचायत महामई और नागरी की सीमा में बसे ग्राम असरोही और नगला धोबी में जलभराव की समस्या विकराल रूप ले चुकी है। लगातार बढ़ते जलभराव और प्रशासन की अनदेखी से नाराज़ ग्रामीणों ने रविवार को प्रदर्शन कर जल निकासी के स्थायी समाधान की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से चली आ रही यह समस्या अब गंभीर रूप ले चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
ग्रामीण दलबीर, सतीश कुमार, विजय बहादुर, आकाश, गंगाप्रसाद, सुरेश चंद्र, भानुप्रताप, अशोक कुमार, छोटेलाल, आनंद स्वरूप, वीरपाल, रामगोपाल, महेंद्र प्रताप, बतासी देवी, लोंगश्री, दानश्री, रामा, शिवानी, सीमा देवी, सूरजवती, मेघा सहित कई बुजुर्गों ने बताया कि गांव के बीचोंबीच स्थित तालाब में पहले पानी एकत्र होकर सिरसा नदी की ओर बह जाता था। कुछ बुजुर्गों ने बताया कि तालाब से निकलने वाला नाला खेतों के मध्य बनी चकरोड़ पर बना था, जिससे जलभराव नहीं होता था।
ग्रामीणों का कहना है कि नाला बंद होने और जल निकासी व्यवस्था बिगड़ने से बारिश न होने के बावजूद गली-मोहल्लों में गंदा पानी भरा रहता है। कई घरों में पानी घुसने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है।
कुछ ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर खुलासा किया कि गांव में लगभग दो सौ मकान हैं, जिनमें आठ सौ से एक हजार लोग रहते हैं। इन मकानों में करीब ढाई सौ समरसेवल लगे हुए हैं, जिनमें से कई बिजली चोरी से लगातार चलती रहती हैं, जिससे जल स्तर असामान्य रूप से बढ़ रहा है और जलभराव की समस्या और गंभीर हो रही है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से नालियों की तत्काल सफाई, बंद पड़े नाले को दोबारा खोलने और पक्की जल निकासी व्यवस्था बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे बड़ा आंदोलन करने को बाध्य
होंगे।




