पूर्व दस्यु सुंदरी सीमा परिहार ने बतायी बीहड़ों से बदलाव की बुलंद दास्तान
इकदिल हाइवे पर पूर्व दस्यु सुंदरी सीमा परिहार से संवादअपराध की राह छोड़ आत्मपरिवर्तन तक का प्रेरक सफर

बीहड़ों से बदलाव की बुलंद दास्तान
इकदिल हाईवे पर पूर्व दस्यु सुंदरी सीमा परिहार से संवाद, अपराध की राह छोड़ आत्मपरिवर्तन तक का प्रेरक सफर
मॉर्निंग इंडिया न्यूज़ सम्पादकीय
इटावा।
इकदिल हाईवे पर कानपुर की ओर जाते समय पूर्व दस्यु सुंदरी सीमा परिहार का कुछ समय के लिए रुकना एक साधारण घटना नहीं, बल्कि परिवर्तन, साहस और आत्मपरिवर्तन की जीवंत मिसाल बन गया। इस दौरान सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों से हुई उनकी आत्मीय मुलाकात ने बीहड़ों से समाज की मुख्यधारा तक के उनके संघर्षपूर्ण सफर को एक बार फिर सामने ला दिया।
चंबल अंचल के बीहड़ों से जुड़ा सीमा परिहार का नाम कभी दस्यु इतिहास में चर्चित रहा। कठिन परिस्थितियाँ, सामाजिक असुरक्षा और पारिवारिक मजबूरियाँ उन्हें अपराध की दुनिया की ओर ले गईं। एक समय हथियारबंद गिरोह की सदस्य रहीं सीमा परिहार ‘दस्यु सुंदरी’ के नाम से जानी गईं। बीहड़ों का जीवन भय, संघर्ष और अनिश्चितता से भरा रहा, लेकिन उनके भीतर सामान्य और सम्मानजनक जीवन जीने की चाह कभी समाप्त नहीं हुई।
सरकार की आत्मसमर्पण नीति और समाज के सहयोग से उन्होंने दस्यु जीवन त्याग कर कानून के समक्ष आत्मसमर्पण किया। इसके बाद समाज की मुख्यधारा में लौटकर उन्होंने नए जीवन की शुरुआत की। आज सीमा परिहार युवाओं और भटके हुए लोगों को गलत रास्ता छोड़कर सकारात्मक और सार्थक जीवन अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
इसी क्रम में हिन्दू जागरूकता संस्थान के कार्यकर्ताओं के साथ उनकी शिष्टाचार भेंट पत्रकार स्वाती सिंह से हुई। संवाद के दौरान सीमा परिहार ने बीहड़ों के जीवन के कटु अनुभव साझा किए। उन्होंने अभिनेता सलमान खान के चर्चित शो ‘बिग बॉस’ से जुड़े प्रसंगों का भी उल्लेख किया। साथ ही यह जानकारी दी कि वे अपने जीवन पर आधारित फिल्म बनाने की योजना पर कार्य कर रही हैं, ताकि संघर्ष और परिवर्तन की उनकी कहानी समाज के हर वर्ग तक पहुँच सके।
इस अवसर पर हिन्दू जागरूकता संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदीप नंबरदार, पदाधिकारी ध्रुव भारद्वाज, भुवनेश दुबे और सीताराम शाक्य उपस्थित रहे। पत्रकार स्वाती सिंह द्वारा सीमा परिहार का स्वागत किया गया। वहीं पत्रकार राजकुमार, उमेश राठौर, अल्ताफ अंसारी और राजनारायण (भूरे) सहित अन्य लोग भी इस संवाद के साक्षी बने।
इकदिल हाईवे पर हुई यह मुलाकात यह स्पष्ट संदेश देकर गई कि हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, जीवन में बदलाव संभव है। बीहड़ों से समाज की मुख्यधारा तक का सीमा परिहार का सफर आज भी लोगों के लिए प्रेरणा, साहस और उम्मीद की मजबूत मिसाल बना हुआ है










