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विकसित भारत ग्रामीण रोजगार आजीविका मिशन गारंटी योजना पर लोगो ने राय व्यक्त की

इस क़ानून पर ज़ब इससे जुड़े लोगो से बात की गयी तो अलग अलग विचार व्यक्त किये गए

विकसित भारत ग्रामीण रोजगार आजीविका मिशन गारंटी योजना पर लोगों ने राय व्यक्त की

विमल राजपूत महेबा

केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा की जगह पर नया कानून वी वी जी राम जी कानून लागू होने पर लोगों ने अपने अपने अलग अलग विचार व्यक्त किए है विदित हो कि कांग्रेस सरकार द्वारा वर्ष 2005 नरेगा के नाम से तथा वर्ष 2008 में पूरे देश में लागू किया गया तथा बाद में इसका नाम बदलकर नरेगा से मनरेगा यानी कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना किया गया जिसमें ग्रामीण मजदूरों को वर्ष में 100 दिन का रोजगार मिल सके वहीं ग्रामीण मजदूरों का पलायन न हो तथा उन्हें अपने गांव में ही रोजगार मिले ।

वहीं इसके क्रियान्वयन के लिए गांव स्तर पर ग्राम रोजगार सेवकों की नियुक्ति की गई थी पर केंद्र सरकार ने पिछले दिनों मनरेगा को बदलकर वीं वीं रामजी यानी कि विकसित भारत ग्रामीण रोजगार आजीविका गारंटी मिशन योजना कर दिया तथा काम के दिनों की संख्या बढ़ाकर 100 से 125 कर दी गई ।

इस कानून पर जब इससे जुड़े लोगों से बात की गई तो अलग अलग विचार व्यक्त किए ।

कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष सतीश नागर ने कहा कि सरकार नाम बदलकर चल रही योजनाओं को खत्म करने का कार्य किया है वर्तमान भाजपा सरकार मजदूर ,किसान ,व्यापारी एवं छात्र विरोधी है इसी योजना को मजदूरी के दिन बढ़ाकर तथा समय से भुगतान करने की गारंटी देनी चाहिए थी ।

वहीं भाजपा नेता मीनाक्षी चौहान ने कहा कि सरकार द्वारा मजदूरी की संख्या बढ़ाना विकसित भारत का खाका खींचा गया है इसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए मजदूरी के दिनों की संख्या बढ़ाकर सरकार ने अच्छा काम किया यह योजना ग्रामीण रोजगार ,आय और बुनियादी ढांचे को मजबूत करते हुए देश के समग्र विकास के योगदान करने पर केंद्रित है यह ग्रामीण मजदूरों को रोजगार व आय की पूर्ण गारंटी देती है।

वहीं आजाद समाज वादी पार्टी के जिला उपाध्यक्ष राघवेंद्र सिंह दोहरे ने कहा कि नाम बदलने के बजाय सरकार को मजदूरी के दिनों की संख्या करीब 150 दिन करनी चाहिए तथा मजदूरी बढ़ाकर कम से कम चार सौ रुपए करनी चाहिए थी ।

वहीं सपा नेता एवं सहकारी संघ महेवा के अध्यक्ष पंडित राजीव चौधरी ने कहा कि राज्य व केंद्र सरकार केवल नाम बदलने व चल रही योजनाओं के स्वरूप में परिवर्तन कर रही नया कुछ भी सरकार के पास नहीं है ।

वहीं जब मजदूर रामसिंह ,ओमदत ,अमन सिंह आदि से बात की तो उन्होंने कहा कि उन्हें तो मजदूरी से मतलब है योजना कोई भी हो समय से काम व मजदूरी मिलनी चाहिए।

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