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कैंसर: सिर्फ मरीज नहीं, पूरा परिवार पीड़ा और संघर्ष झेलता है 

इलाज के साथ-साथ मरीज और उसके परिवार को सहयोग और सुरक्षा देना भी उतना ही जरूरी है।

*कैंसर: सिर्फ मरीज नहीं, पूरा परिवार पीड़ा और संघर्ष झेलता है*

 

कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के दौरान केवल मरीज ही नहीं, बल्कि पूरा परिवार गहरे मानसिक, शारीरिक और आर्थिक संकट से गुजरता है। यह बीमारी सिर्फ शरीर पर नहीं, बल्कि परिवार की पूरी व्यवस्था पर भारी प्रभाव डालती है। इलाज के साथ-साथ जो संघर्ष परिवार को झेलना पड़ता है, उसे शब्दों में व्यक्त करना कठिन है।

 

मैं पिछले लगभग 6 महीनों से अपने घर के एक जिम्मेदार सदस्य के कैंसर उपचार में लगातार लगा हुआ हूँ। इस दौरान मैंने देखा है कि मरीज को जहां असहनीय शारीरिक पीड़ा और मानसिक तनाव सहना पड़ता है, वहीं परिवार को भी निरंतर चिंता, भागदौड़ और जिम्मेदारियों का बोझ उठाना पड़ता है।

 

चूंकि उस व्यक्ति की जिम्मेदारी पूरी तरह मेरी है, इसलिए मुझे न केवल उनके इलाज की व्यवस्था करनी पड़ रही है, बल्कि इस दौरान मुझे मानसिक दबाव के साथ-साथ भारी आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ा है। अस्पतालों में भर्ती, जांच, दवाइयों, यात्रा और अन्य आवश्यकताओं का खर्च इतना अधिक है कि उसकी भरपाई करने में वर्षों लग सकते हैं।

 

आज के समय में केवल कैशलेस स्वास्थ्य व्यवस्था को पर्याप्त मान लेना एक अधूरी सोच है। वास्तविकता यह है कि बीमारी के दौरान परिवार को जो आर्थिक क्षति होती है, उसकी भरपाई के लिए भी विशेष सहायता और फंड की व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है।

 

अस्पतालों की प्रणाली में व्यापक सुधार की जरूरत है। यदि हम दुनिया की चार सबसे बड़ी GDP वाली अर्थव्यवस्था में शामिल हैं, तो हमें अपनी चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं को भी उसी स्तर तक मजबूत बनाना होगा। अन्यथा विकास के ये आंकड़े आम नागरिक के जीवन में कोई वास्तविक बदलाव नहीं ला पाएंगे।

 

कैंसर जैसी बीमारियों पर गंभीर चिंतन करना और स्वास्थ्य व्यवस्था को मानवीय एवं सहायक बनाना आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इलाज के साथ-साथ मरीज और उसके परिवार को सहयोग और सुरक्षा देना भी उतना ही जरूरी है।

 

 

 

 

लेखक:

 गौरव भारतीय द्विवेदी

कोर्डिनेटर, फैकल्टी ऑफ लाॅ

एफ एस विश्वविद्यालय, शिकोहाबाद

उत्तर प्रदेश

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