मुआवजे के लिए दर-दर भटक रहा परिवार,सरकार के वादे ‘सबका साथ-सबका विकास’ पर उठे सवाल
आग से उजड़ी गरीब किसान की दुनिया, 15 बकरियों की जलकर मौत

आग से उजड़ी गरीब किसान की दुनिया, 15 बकरियों की जलकर मौत
संवाददाता
राजीव कुमार इकदिल
मुआवजे के लिए दर-दर भटक रहा परिवार,सरकार के वादे ‘सबका साथ-सबका विकास’ पर उठे सवाल
इटावा।
जनपद इटावा के थाना इकदिल के अंतर्गत ग्राम पंचायत शैखुपुर जखोली मे बीते दिनों संदिग्ध परिस्थितियों में लगी आग ने एक गरीब किसान की पूरी गृहस्थी तबाह कर दी। इस दर्दनाक हादसे में 15 बकरियों की जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि घर में रखा अनाज, कपड़े, चारपाई व अन्य घरेलू सामान पूरी तरह राख हो गया। घटना के बाद से पीड़ित परिवार मुआवजे के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत शैखुपुर जखोली निवासी हरिशंकर उर्फ टीटी (उम्र लगभग 50 वर्ष) पुत्र स्वर्गीय रामभरोसे के घर दिनांक 08 जनवरी 2026 को सुबह करीब 5 बजे अचानक आग लग गई। पीड़ित उस समय किसी कार्यवश घर से बाहर गया हुआ था। कुछ समय बाद जब वह लौटा तो घर से आग की ऊंची-ऊंची लपटें उठती दिखाई दीं।
आग इतनी भीषण थी कि घर में बंधी 15 बकरियां मौके पर ही जलकर मर गईं, वहीं घर का सारा सामान जलकर नष्ट हो गया। पीड़ित परिवार पहले से ही अत्यंत गरीब है, ऐसे में यह हादसा उनके लिए जीवन की सबसे बड़ी त्रासदी बनकर सामने आया है।
घटना की सूचना मिलने पर जिले के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और पीड़ित परिवार को मुआवजा दिलाए जाने का आश्वासन दिया गया। लेकिन हकीकत यह है कि आज तक पीड़ित को कोई आर्थिक सहायता नहीं मिल सकी है।
आज ग्राम पंचायत में आयोजित ग्राम चौपाल के दौरान पीड़ित परिवार ने अपनी पीड़ा मुख्य विकास अधिकारी अजय कुमार गौतम के समक्ष रखी।
न्याय प्रिय मुख्य विकास अधिकारी ने मौके पर जब इस संबंध में लेखपाल राजवीर कठेरिया एवं सचिव सपना यादव से जानकारी मांगी, तो लेखपाल औऱ सचिव कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके, जिससे प्रशासनिक लापरवाही साफ तौर पर उजागर हो गई।
पीड़ित परिवार का कहना है कि वह पिछले कई दिनों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहा है, लेकिन केवल आश्वासन के अलावा कुछ भी नहीं मिल रहा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जनपद में ‘सबका साथ-सबका विकास’ के नारे की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, जबकि एक गरीब परिवार सरकारी सहायता के इंतजार में टूटता जा रहा है।
अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब तक यह गरीब परिवार सरकार द्वारा मिलने वाले आर्थिक सहयोग का इंतजार करता रहेगा, और कब प्रशासन केवल कागजी आश्वासन से बाहर निकलकर जमीनी स्तर पर मदद करेगा?




