दसवें दिन टूटी भूख हड़ताल, सदर विधायक ने तुड़वाया अनशन
मौके पर पहुँचे मुख्य विकास अधिकारी बीडीओ डीपी आर ओ लेखपाल ग्राम पंचायत सचिव सपना यादव व ग्राम प्रधान प्रमोद दोहरे

दसवें दिन टूटी भूख हड़ताल, सदर विधायक ने तुड़वाया अनशन


इटावा। ग्राम पंचायत शेखूपुर जखौली में रेलवे अंडरपास में जलभराव और आवागमन की समस्या को लेकर पिछले दस दिनों से चल रहा धरना प्रदर्शन और भूख हड़ताल शनिवार को समाप्त हो गई। सदर विधायक सरिता भदौरिया मौके पर पहुंचीं और भूख हड़ताल पर बैठी महिलाओं को पानी पिलाकर अनशन तुड़वाया। विधायक के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने आंदोलन समाप्त कर दिया।
सदर विधायक ने मौके पर मौजूद ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों से बातचीत कर कार्य को सुचारू रूप से शुरू कराया। उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि रेलवे अंडरपास की समस्या के स्थायी समाधान के लिए जल्द ही रेल मंत्री से वार्ता की जाएगी। साथ ही पुल की व्यवस्था कराने का प्रयास किया जाएगा।
आंदोलन के दौरान जिला पंचायत सदस्य सचिन यादव ने भी भूख हड़ताल पर बैठे ग्रामीणों की आवाज भाजपा के वरिष्ठ नेताओं तक पहुंचाई। उन्होंने ग्रामीणों की समस्या को गंभीरता से रखते हुए समाधान कराने के लिए प्रयास किए। इसके बाद जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मौजूदगी में ग्रामीणों को जल्द समस्या के समाधान का भरोसा मिला।
भूख हड़ताल के संयोजक दीपक राज भी मौके पर मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि ग्रामीण लंबे समय से रेलवे अंडरपास की समस्या से परेशान हैं। दस दिनों तक चले आंदोलन के बाद विधायक के आश्वासन पर भूख हड़ताल समाप्त की गई है।
मौके पर इकदिल चेयरमैन प्रतिनिधि अभिषेक गोयल, इटावा के मुख्य विकास अधिकारी, बीडीओ, डीपीआरओ, लेखपाल, ग्राम पंचायत सचिव सपना यादव और ग्राम प्रधान प्रमोद दोहरे ग्राम पंचायत सहायक शनी ठाकुर सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
ग्राम पंचायत सचिव सपना यादव के प्रयासों से मौके पर संबंधित कार्य को आगे बढ़ाया गया और काम सुचारू रूप से शुरू कराया गया। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में ग्रामीणों को समस्या के समाधान का भरोसा दिया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि रेलवे अंडरपास में लंबे समय से जलभराव के कारण शेखूपुर जखौली सहित आसपास के कई गांवों के लोगों को आवागमन में परेशानी उठानी पड़ रही थी। बच्चों की पढ़ाई, मजदूरी, बाजार और अस्पताल तक पहुंचने में भी दिक्कत हो रही थी। दस दिनों तक चले धरना प्रदर्शन और भूख हड़ताल के बाद अब ग्रामीणों को स्थायी समाधान की उम्मीद है।




