डीफसीसी के जेपीएम न्यू इकदिल की लापरवाही से किसान परेशान।
इकदिल कस्बा के क्षेत्रीय किसान परेशान

डीफसीसी के जेपीएम न्यू इकदिल की लापरवाही से किसान परेशान।

“मिशन इकदिल ब्लॉक” संयोजक व समाजसेवी दीपक राज ने बताया कि डी एफ सी सी न्यू इकदिल के जेपीएस गोतम की लापरवाही की वजह से लगभग पांच छः गांव के किसान परेशान है दरअसल कॉरिडोर रेल मार्ग के पोल नं० 622 /40 (डाउन लाइन) के पास एक पुलिया है जिससे इन गांवों के निवासी किसानों-मजदूरों को कृषि कार्य हेतु इधर से उधर लाइन पार आना जाना पड़ता है यहां पर बनी पुलिया का फर्श आसपास की जमीन के अनुपात में नीचा है जिससे थोड़ी भी वर्षा होने पर चारों तरफ का पानी इसमें भर जाता है और दलदल बन जाता है। बरसात के मौसम में तो यहां की स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। बढ़पुरा विकासखंड की ग्राम पंचायत चादनपुर व गांव कोठी के किसान जिनकी खेती लाइन पार पड़ती है, बेचेलाल, मलखान, प्रेमचंद, तहसीलदार, राजाराम, बच्चू लाल, सत्यनारायण आदि का कहना है की बरसात के समय हम लोग कृषि कार्य हेतु अपने खेतों पर आने जाने के लिए लगभग चार-पांच किलोमीटर का चक्कर लगाकर अन्य पुल से होकर जाते हैं इस दौरान हम लोगों को बेहद परेशानियां से जूझना पड़ता है रेल अधिकारियों,कर्मचारियों से हम लोग कहते रहते हैं लेकिन इन पर कोई फर्क नहीं पड़ता। कभी-कभी तो हमारे बच्चे ऊपर से चढ़कर लाइन पार करने लगते हैं खेत पर शीघ्र पहुंचने के लिए हम लोगों को भी कभी-कभी ऐसा करना पड़ता है लेकिन हादसे का बहुत डर लगा रहता है। कभी-कभी जल्दबाजी में लाइन पार करते समय हादसे भी हो जाते हैं। उधर लाइन पार उत्तर साइड में बसे नगला मानसिंह, नगला बढ़ईयान, शेखूपुर जखोली, महानेपुर केशोंपुर आदि के किसानों को खाद बीज लेने के लिए सहकारी समिति चांदनपुर आना पड़ता है। इन लोगों को भी दूसरे पुलों का ही सहारा लेना पड़ता है और एक किमी की जगह तीनचार किमी चलना पड़ता है। इनमें से कई गांव के बच्चों को पढ़ने के लिए व लोगों को बाजार के लिए इकदिल व इटावा आना जाना पड़ता है। पुलिया के अंदर जल भराव व दलदल की वजह से सभी को आने-जाने में बहुत परेशानी होती है साल के लगभग सात आठ महीने तक यही परेशानियों का दौर चलता है।
दीपक राज ने आगे बताया कि कॉरिडोर रेल कर्मचारी व अधिकारियों की लापरवाही व अनदेखी से यहां के किसान बहुत ही आक्रोशित हैं उनका कहना है कि अगर हम लोगों को कोई अन्याय पूर्ण काम करना पड़ा तो इसके लिए जिम्मेदार रेल कर्मचारी व अधिकारी होंगे।




